युवराज सिंह के पर्सनलिटी राइट्स पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त

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युवराज सिंह के पर्सनलिटी राइट्स पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त: AI डीपफेक और फर्जी वीडियो हटाने का आदेश

मामला क्या है

पूर्व भारतीय क्रिकेटर और 2011 वर्ल्ड कप के हीरो युवराज सिंह की पहचान अब अदालत की सुरक्षा में है। दिल्ली हाईकोर्ट ने उनके पर्सनलिटी राइट्स यानी व्यक्तित्व अधिकारों को सुरक्षा देते हुए एक अहम अंतरिम आदेश पारित किया है। कोर्ट ने साफ कर दिया कि युवराज सिंह के नाम, तस्वीर, आवाज, चेहरे या उनकी किसी भी पहचान का इस्तेमाल उनकी अनुमति के बिना कोई नहीं कर सकता — चाहे वह इस्तेमाल व्यक्तिगत फायदे के लिए हो या व्यावसायिक मुनाफे के लिए।

यह आदेश उस दौर में आया है जब AI तकनीक के जरिए किसी की भी नकली तस्वीरें और वीडियो बनाना चंद सेकंड का खेल बन गया है, और सेलिब्रिटीज़ इसका सबसे आसान निशाना बन रहे हैं।

अदालत ने क्या पाया

इस मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस ज्योति सिंह ने माना कि प्रथम दृष्टया युवराज सिंह का पक्ष काफी मजबूत नजर आता है। कोर्ट ने कहा कि अगर उन्हें तुरंत कानूनी संरक्षण नहीं दिया गया, तो उनकी वर्षों की मेहनत से बनी छवि और प्रतिष्ठा को ऐसा नुकसान पहुंच सकता है जिसकी भरपाई शायद बाद में संभव ही न हो। इसी तर्क के आधार पर कोर्ट ने एकपक्षीय अंतरिम आदेश जारी करते हुए तत्काल राहत दी।

किन-किन तकनीकों पर लगी रोक

हाईकोर्ट का आदेश सिर्फ पारंपरिक फोटोशॉप या मॉर्फिंग तक सीमित नहीं है। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि यह रोक हर उस तकनीक पर लागू होगी जिससे युवराज सिंह की झूठी पहचान गढ़ी जा सकती है, जैसे:

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और जनरेटिव AI
  • मशीन लर्निंग आधारित टूल्स
  • डीपफेक वीडियो
  • AI चैटबॉट्स जो उनकी पहचान का इस्तेमाल करें
  • फेस मॉर्फिंग और फेस स्वैपिंग

यानी कोई भी ऑडियो या वीडियो जिसमें उनकी शक्ल, आवाज या अंदाज़ में छेड़छाड़ की गई हो, अब कानूनन प्रतिबंधित है — बनाना भी और फैलाना भी।

Delhi High Court gavel with Yuvraj Singh silhouette symbolizing personality rights protection against AI deepfakes

याचिका में क्या-क्या शिकायतें थीं

याचिका के मुताबिक सोशल मीडिया पर कई अकाउंट्स से AI की मदद से युवराज सिंह की भ्रामक तस्वीरें और वीडियो लगातार वायरल किए जा रहे थे। इनमें कुछ खास तौर पर आपत्तिजनक उदाहरण सामने आए:

  • एक फर्जी तस्वीर में उन्हें स्वर्ण मंदिर में सिर बिना ढके खड़ा दिखाया गया
  • एक अन्य तस्वीर में एक साथी क्रिकेटर को उनके पैर छूते हुए दर्शाया गया
  • कई पोस्ट में उन्हें हिंसक और अपमानजनक व्यवहार करते दिखाया गया
  • उनके नाम से महिलाओं के प्रति आपत्तिजनक विचार तक जोड़े गए, जो पूरी तरह मनगढ़ंत थे

इसके अलावा याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि कुछ विक्रेता उनकी अनुमति के बिना उनके नाम और फोटो वाले टी-शर्ट, फोटो फ्रेम और स्टिकर बेच रहे हैं — जिससे ग्राहकों में यह गलतफहमी बन रही है कि इन प्रोडक्ट्स को खुद युवराज सिंह का समर्थन हासिल है।

कोर्ट की टिप्पणी: पर्सनलिटी राइट्स पर क्या कहा

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में दोहराया कि भारतीय अदालतें लंबे समय से व्यक्तित्व अधिकारों को मान्यता और संरक्षण देती आई हैं। किसी भी व्यक्ति की पहचान — उसका नाम, तस्वीर, आवाज या अन्य पहचान चिन्ह — का इस्तेमाल करने का हक तीसरे पक्ष को नहीं होता, जब तक कि वह व्यक्ति खुद इसकी इजाज़त न दे।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि युवराज सिंह जैसी प्रतिष्ठित शख्सियत को अपने व्यक्तित्व और उससे जुड़े सभी गुणों पर विशेष अधिकार हासिल है, और उन्हें व्यावसायिक तौर पर इस्तेमाल करने का हक सिर्फ उन्हीं के पास सुरक्षित है।

कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि AI से गढ़े गए फर्जी वीडियो और पोस्ट किसी सेलिब्रिटी की वर्षों की मेहनत से बनी छवि को पल भर में नुकसान पहुंचा सकते हैं, और बिना अनुमति उनके नाम पर सामान बेचना उनके पर्सनलिटी राइट्स के व्यावसायिक मूल्य को भी कमजोर करता है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को सख्त निर्देश

आदेश में सिर्फ शब्दों तक बात नहीं रुकी — कोर्ट ने ठोस समयसीमा भी तय की:

  • मेटा को आदेश में चिन्हित सभी आपत्तिजनक यूआरएल 36 घंटे के भीतर हटाने का निर्देश
  • अमेजन और फ्लिपकार्ट को संबंधित नकली उत्पादों की लिस्टिंग तुरंत हटाने का आदेश
  • दो अन्य विक्रेताओं को 24 घंटे के भीतर आपत्तिजनक सामग्री हटाने का निर्देश

इसके साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर भविष्य में युवराज सिंह की पहचान का कोई नया अनधिकृत इस्तेमाल सामने आता है, तो उन्हें संबंधित प्लेटफॉर्म पर शिकायत दर्ज कराने या अन्य कानूनी रास्ता अपनाने की पूरी आजादी होगी।

यह फैसला क्यों अहम है

यह आदेश सिर्फ एक क्रिकेटर की निजी लड़ाई नहीं, बल्कि भारत में AI युग के लिए एक बड़ा कानूनी संकेत है। जिस तेजी से डीपफेक तकनीक आम होती जा रही है, उसमें अदालतों का यह रुख भविष्य में कई और सेलिब्रिटीज़ और आम नागरिकों के लिए भी नजीर बन सकता है। कोर्ट ने साफ कर दिया कि पर्सनलिटी और प्राइवेसी के अधिकारों का उल्लंघन करने वालों से सख्ती से निपटा जाना चाहिए — यानी अब सिर्फ माफी या डिलीट कर देना काफी नहीं, कानूनी नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं।


नोट: यह लेख दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश की रिपोर्टिंग पर आधारित है। अदालती दस्तावेज़ों के मूल पाठ के लिए संबंधित न्यायालय की आधिकारिक वेबसाइट देखें।

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