पंजाब में ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड गठन पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से समयसीमा स्पष्ट करने के निर्देश

Date:

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को फटकार लगाते हुए राज्य में ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड के गठन की समयसीमा स्पष्ट करने को कहा है। हाईकोर्ट ने जोर देते हुए कहा कि अगली सुनवाई पर किसी भी पक्ष की ओर से स्थगन की मांग स्वीकार नहीं की जाएगी।

न्यायालय की सख्ती और अगली सुनवाई की तारीख
जस्टिस कुलदीप तिवारी की एकल पीठ ने इस मामले की अगली सुनवाई 3 अप्रैल 2025 को निर्धारित की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई की तारीख पर किसी भी प्रकार की टालमटोल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

ममता बाबा की याचिका और कानून का संदर्भ
यह याचिका ममता बाबा नामक एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति द्वारा दायर की गई थी, जिसमें उन्होंने ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 का हवाला दिया है। यह कानून ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा और कल्याण के लिए लागू किया गया था। इसके साथ ही, ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) नियम, 2020 भी प्रभावी किया गया है।

ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड का कानूनी महत्व
नियम 10(1) के तहत, सरकारों के लिए यह अनिवार्य है कि वे ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों और हितों की रक्षा करें। साथ ही, सरकारी योजनाओं और कल्याणकारी उपायों तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए वेलफेयर बोर्ड का गठन किया जाना आवश्यक है।

भारत सरकार की गाइडलाइन और राज्य की लापरवाही
भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने 10 नवंबर 2023 को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पत्र जारी कर ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड के गठन का निर्देश दिया था। इसका उद्देश्य ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) नियम, 2020 के नियम 10(1) का अनुपालन सुनिश्चित करना था।

प्रतिनिधित्व के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं
ममता बाबा ने बताया कि उन्होंने पंजाब में ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड के गठन के लिए एक औपचारिक प्रतिनिधित्व भेजा था। इसके जवाब में सूचित किया गया कि यह मामला अभी विचाराधीन है, जो सरकार की उदासीनता को दर्शाता है।

हाईकोर्ट की सख्ती और जिला स्तर पर ट्रांसजेंडर प्रोटेक्शन सेल
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने न केवल वेलफेयर बोर्ड पर सवाल उठाए, बल्कि प्रत्येक जिले में जिला मजिस्ट्रेट के अधीन ट्रांसजेंडर प्रोटेक्शन सेल की स्थापना की प्रगति पर भी जानकारी देने को कहा है। यह स्पष्ट संकेत है कि हाईकोर्ट इस मामले में गंभीरता से कार्रवाई चाहता है।

निष्कर्ष
ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी ढांचे का प्रभावी क्रियान्वयन आवश्यक है। पंजाब सरकार को हाईकोर्ट की इस सख्ती को गंभीरता से लेते हुए समयबद्ध तरीके से ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड का गठन करना चाहिए। यह कदम ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के सामाजिक अधिकारों को मजबूती प्रदान करेगा और कल्याणकारी योजनाओं तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करेगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_img

Popular

More like this
Related

पत्नी के अफेयर का शुरुआती सबूत ही तय करेगा अंतरिम गुज़ारा-भत्ते की किस्मत

वैवाहिक विवादों में गुज़ारा-भत्ते को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने...

युवराज सिंह के पर्सनलिटी राइट्स पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त

युवराज सिंह के पर्सनलिटी राइट्स पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त:...